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नाग पंचमी और कालसर्प दोष

Last Updated: 7/23/2012 1:28:00 PM

nag panchami, kal sarp dosh

क्यों मनाते हैं नागपंचमी?

धर्मग्रंथों के अनुसार नागपंचमी के दिन नाग अर्थात सर्प के दर्शन व उसके पूजन का विशेष फल मिलता है। जो भी व्यक्ति नागपंचमी के दिन नाग की पूजा करता है उसे कभी भी नाग अर्थात सांप का भय नहीं होता और न ही उसके परिवार में किसी को नागों द्वारा काटे जाने का भय सताता है। नागपंचमी का पर्व मनाए जाने के पीछे जो कथा प्रचलित है वह संक्षेप में इस प्रकार है। एक किसान जब अपने खेतों में हल चला रहा था उस समय उसके हल से कुचल कर एक नागिन के बच्चे मर गए। अपने बच्चों को मरा देखकर क्रोधित नागिन ने किसान, उसकी पत्नी और लड़कों को डस लिया। जब वह किसान की कन्या को डसने गई तब उसने देखा किसान की कन्या दूध का कटोरा रखकर नागपंचमी का व्रत कर रही है। यह देख नागिन प्रसन्न हो गई। उसने कन्या से वर मांगने को कहा। किसान कन्या ने अपने माता-पिता और भाइयों को जीवित करने का वर मांगा। नागिन ने प्रसन्न होकर किसान परिवार को जीवित कर दिया। और तभी से यह परम्परा चली आ रही है कि श्रावण शुक्ल पंचमी को नागदेवता का पूजन करने से किसी प्रकार का कष्ट और भय नहीं रहता।

यह नागपंचमी विशिष्ट क्यों है?

इस बार की नागपंचमी अपने आपमें बहुत विशिष्ट है। उसका मुख्य कारण यह है कि आजकल ज्योतिष जगत में जिस कालसर्प दोष को लेकर बडी-बडी चर्चाएं हो रही हैं वही दोष ग्रहों के मध्य इस विशेष तिथि के दिन निर्मित हो रहा है। सबसे मजेदार बात यह है कि इस तिथि को कालसर्प दोष निवारण करने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यानी दोष निवारण करने वाली तिथि के दिन दोष का निर्माण होना एक दुर्लभ योग है। वैसे तो यह योग कुछ सालों के अंतराल में बन जाता है लेकिन राहू, केतू के लिए नीच कही जाने वाली राशियों क्रमश: वृश्चिक और बृष राशि में नाग पंचमी के साथ-साथ सोमवार के दिन इस योग का होना बहुत ही दुर्लभ और खास है। ऐसे कालसर्प योग के बनने की शुरुआत शनिवार के दिन से होना इसे और खास बना देता है। अर्थात कालसर्प योग, नीच राशि के राहू-केतू और सोमवार का दिन होने के कारण इस बार की नाग पंचमी का दिन बहुत ही विशिष्ट फलदायी रहेगा।

देश दुनिया पर असर

इस कालसर्प दोष के कारण देश-दुनिया में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। राहु-केतु परेशानियां और दुर्घटनाओं के कारक होते हैं। अत: कुछ बदलाव सकारात्मक भी हो सकते हैं लेकिन अधिकांश बदलाव आम जनता को असंतुष्ट करने वाले वाले हो सकते हैं। कोई प्राकृतिक आपदा भी आ सकती है। भूकंप और बारिश की असामान्य स्थिति बनेगी। यदि भारत की बात की जात तो इसकी कुण्डली में ही कालसर्प योग बना हुआ है लेकिन यह इसके ठीक विपरीत है। यानी वह राहू-केतू की उच्च राशियों है जबकि जिसकी चर्चा हम कर रहे हैं वह नीच राशियों में है। अत: भारत के पडोसी देशों से सम्बंध बिगड सकते हैं। कोई बडी दुर्घटना, उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में तेज बारिश, कहीं कहीं सूखा, धार्मिक पतन, राजनैतिक उठा-पठक, शेयर-बाजार कमजोर लेकिन तकनीकी क्षेत्र में विकास आदि घटनाएं हो सकती हैं।

विभिन्न राशियों पर असर और उपाय

मेष: किसी शुभ काम में मेहनत करने से उन्नति के योग बनेंगे। शत्रुओं पर और कानूनी मामलों में जीत होगी। मान प्रतिष्ठा और धन में बढोत्तरी होगी। शेयर बाजार से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। व्यवसायियों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। लेकिन पेट संबंधित परेशानियां और मानसिक अशांति रह सकती है। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए बैल को जौ खिलाएं।

वृष: अचानक आर्थिक पक्ष को मजबूती देने वाली स्थितियां बन सकती हैं। निजी संबंध प्रेम पूर्ण और सहयोग पूर्ण रहेंगे। व्यवसायिक अवसर सामने आ सकते हैं लेकिन उनसे जुडे निर्णय लेने में आप स्वयं को असहज अनुभव करेंगे। संतान और शिक्षा के लिए भी समय अनुकूल नहीं है। नई योजनाओं में निवेश के लिए समय बहुत अनुकूल नहीं है। अत: जोखिम से बचना उचित रहेगा। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए किसी मंदिर या धर्म स्थल पर श्वेत वस्त्र का ध्वज चढ़ाएं।

मिथुन: कार्यक्षेत्र में पदोन्न्ति के योग बन सकते हैं। भूमि और वाहन से सुख मिलेगा या इनका लाभ होगा। व्यवसायियों और ठेकेदारों के लिए समय अनुकूल है। लेकिन विरोधी परेशान कर सकते हैं। धन हानि और मानसिक रूप से परेशान होंने की स्थितियां बन सकती हैं। आपकी माता के लिए समय अपेक्षाकृत कम ठीक है। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए गाय को हरे मूंग खिलाएं।

कर्क: समय मिला जुला रह सकता है। आपमें नई ऊर्जा का संचार हो सकता है। मित्रों के माध्यम से लाभ होगा। अचानक कुछ यात्राएं करनी पड सकती है। किसी नए काम की योजना धीमी गति के साथ बन सकती है। कुछ कामों में अनचाहे बदलाव भी करने पड सकते हैं लेकिन आपको उनका विरोध नहीं करना चाहिए। बौद्धिक कार्यों से जुडे लोगों को लाभ होगा। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें और शिवलिंग के नाग की पूजा करें।

सिंह: कार्य व्यवसाय और निवेश के लिए समय शुभ है। कहीं से अचानक धन लाभ भी हो सकता है। आपकी हाजिर जबाबी भी आपको फायदा करा सकती है। शेयर बाजार से जुड़े लोगों के लिए भी समय शुभ है। लेकिन आपकी माता का स्वास्थ्य कुछ हद प्रभावित रह सकता है। अथवा कुछ घरेलू अशांति रह सकती है। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए एक मुठ्ठी जौ को गोमूत्र से धोकर लाल कपड़े में बांधे और अपने ही घर में किसी वजनदार वस्तु के नीचे दबाएं।

कन्या: आपके लिए यह समय थोडी सी सावधानी बरतने का है। जहां तक हो सके अपनी वाणी पर संयम रखें और अपने स्वास्थ्य का खयाल रखें। रुपये पैसों मे मामले में भी जोखिम उठाना ठीक नहीं रहेगा। कोई नई योजना बनाने से बचें। इस समय पुरानी योजना और पुराने मित्र ही काम आ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव हो सकते हैं। संचार क्षेत्र और तकनिकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल है। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए हाथी दांत से बनी कोई वस्तु छ: महीने तक अपने पास रखें।


तुला: आयात-निर्यात के क्षेत्र से जुडे लोगों के अलावा अन्य लोगों के लिए इस योग का दुष्प्रभाव कुछ महीनों तक कष्टकर रह सकता है। आर्थिक रूप से समय अच्छा नहीं है अत: इस मामले में कोई जोखिम न लें। अचानक यात्राओं का योग भी बन सकता है। भूमि-भवन और वाहन को लेकर भी चिंताएं रह सकती हैं। वैवाहिक जीवन को गंभीरता से लें साथ ही वाणी पर संयम रखें। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए हनुमान जी को रक्त चंदन यानी लाल चंदन चढ़ाएं।

वृश्चिक: सामान्यत; शुभ परिणाम मिलेंगे। आर्थिक लाभ होगा कहीं रूका हुआ पैसा वापस मिल जाएगा। अचानक कहीं जाने की योजना बन सकती है। जिससे नए लोगों से मेलजोल होगा। उच्चस्थ पदाधिकारियों से संबंध मजबूत होंगे। लेकिन स्वास्थ्य कुछ हद तक प्रभावी रह सकता है। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए गौमूत्र से स्नान या गोमूत्र का छिडकाव लाभदायी रहेगा।

धनु: धनु राशि वालों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिल सकती है। यदि आप अपने पैतृक व्यवसाय में हैं तो उसमें आपको लाभ होगा। अभिनय या कला के क्षेत्र से जुडे लोगों के लिए समय शुभ रहेगा। विवाह योग्य लोगों के विवाह की चर्चाएं चल सकती हैं। लेकिन कुछ अनचाहे निर्णय लेने पड सकते हैं। कोई महत्त्वपूर्ण चीज गुम हो सकती है। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए बहते पानी में जौ प्रवाहित करने चाहिए।

मकर: आपके जीवन कें अनुकूलता आएगी। आप किसी काम को लेकर सही और बडा निर्णय लेंगे। शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी। व्यापार व्यवसाय में भी लाभ होगा। आर्थिक मामलों के लिए भी समय अच्छा है। विद्यार्थियों को मनोनुकूल सफलता मिलेगी। वैसे तो कालसर्प दोष का दुष्प्रभाव इन पर प्रभावी नहीं है लेकिन यदि कोई कष्ट हो तो उससे बचने के लिए रुद्राभिषेक करें और स्वयं रूद्र पाठ भी करें।

कुम्भ: इस योग का प्रभाव कुंभ राशि वालों के लिए बहुत शुभदायी नहीं रहेगा। लेकिन तेल, मशीन या पुरातत्व से जुडे लोगों और इतिहासकारों के लिए समय शुभ है। औरों के व्यक्तिगत सम्बंधों में कुछ अप्रियता आ सकती है। एक साथ बहुत सारे कामों को करने का जिम्मा मिल सकता है जिससे आपको परेशानी हो सकती है लेकिन दूसरे इसी काम के लिए आपकी प्रसंशा कर सकते हैं। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए रात में सिरहाने एक कटोरी दूध रखें और सुबह वो दूध किसी कुत्ते को पिलाएं।

मीन: आपके यह ग्रहीय घटनाक्रम समय मिश्रित फलदायी रहेगा। धैर्य के साथ लगातार प्रयास करते हुए आप अपने कार्य में सफल होंगे। यदि आपने चतुराई और कौशल से काम लिया तो व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता मिलेगी अन्यथा अनिर्णय की स्थिति बनी रहेगी। वैवाहिक मामले अथवा जीवन साथी के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं रह सकती हैं। डॉक्टर, वकीलों और शासकीय कर्मचारियों के लिए समय शुभ है। साझेदारी के मामलों में सावधानी से निर्णय लेने की आवश्यकता है। कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं अथवा दानें डालें।

कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए एक सरल उपाय

इस उपाय को आपको नाग पंचमी के दिन करना है। उस दिन सुबह-सबेरे उठकर स्नान आदि कार्यों से निवृत्त होकर किसी शिव मंदिर में जाएं यदि ऐसा सम्भव न हो तो घर पर ही एकांत में भगवान शिव की प्रतिमा के सामने आसन लगाकर महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें।
मंत्र है-

ऊँ हौं ऊँ जूं स: भूर्भुव: स्व: त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् भूर्भुव: स्व: जूं स: हौं ऊँ।।

और प्रत्येक मंत्र जप के साथ एक बिल्वपत्र भगवान शिव पर चढ़ाते जायें। नागपंचमी के बाद 21 दिन तक इस मंत्र का जप 108 बार करते रहें। ऐसा करने से कालसर्प दोष का दुष्प्रभाव कम होगा और कामों में आने वाली बाधाएं दूर होंगी।

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