Author: Vijay Pathak | Last Updated: Fri 28 Nov 2025 4:02:41 PM
एस्ट्रोकैंप के इस 2026 पूर्णिमा लेख में साल 2026 में पड़ने वाली पूर्णिमा की सभी तिथियों और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि ज्योतिष के अनुसार पूर्णिमा का क्या अर्थ है, इसका क्या महत्व होता है और इस तिथि पर क्या ज्योतिषीय उपाय कर के आप अपने ईष्ट देवता को प्रसन्न कर सकते हैं।
अमावस्या की तरह ही पूर्णिमा भी हर महीने में एक बार और साल में कुल 12 बार आती हैं। इनमें से पांच पूर्णिमा की तिथियां ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा तिथि पर व्रत रखने से चंद्र देव के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती समेत श्री लक्ष्मी नारायण की भी कृपा प्राप्त होती है और जातक का घर धन-वैभव एवं सुख-समृद्धि से भर जाता है।
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इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कला के साथ दिखाई देता है। यही वजह है कि हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का बहुत ज्यादा महत्व है। पूर्णमासी पर चंद्रमा के पूर्ण प्रभाव में होने की वजह से उससे मिलने वाले फलों में भी वृद्धि होती है।
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है इसलिए इस दिन व्रत रखने से चंद्रमा के प्रभाव से मन संतुलित और संयमित रहता है। इसके साथ ही इस दिन भगवान शिव का भी पूजन किया जाता है क्योंकि चंद्रमा के ईष्ट देवता भगवान शिव ही हैं। इसके अलावा 2026 पूर्णिमा तिथि पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी उपासना की जाती है। ऐसा करने से सुख-समृद्धि और धन-वैभव आता है।
जैसा कि हमने पहले भी बताया कि साल में कुल 12 पूर्णिमा की तिथियां आती हैं जिनमें माघ पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, सावन पूर्णिमा, आश्चिन पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा शामिल हैं। पूर्णिमा के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुओं का सम्मान किया जाता है। यह पर्व गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को दर्शाता है।
शरद पूर्णिमा की बात करें, तो फसल के मौसम का जश्न इस दिन मनाया जाता है।
कार्तिक मास का समापन कार्तिक पूर्णिमा के साथ होता है।
माघ पूर्णिमा को हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन देवी-देवता स्वर्ग से धरती पर आते हैं और प्रयागराज में स्थित संगम में स्नान करते हैं। यही वजह है कि माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का अत्यधिक महत्व है। इस दिन दान करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।
फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को होली का त्योहार पड़ता है। इसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है। भारत के कई प्रमुख शहरों में होली का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। रंगों की होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है।
आषाढ़ के महीने में आने वाली 2026 पूर्णिमा को विष्णु जी के अंश से उत्पन्न कृष्ण द्वैपायन महर्षि व्यास जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
सावन मास में आने वाली 2026 पूर्णिमा तिथि को हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इसे श्रावणी पर्व के नाम से भी मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देते हैं। देश के कई हिस्सों में श्रावणी पूर्णिमा को नारियल पूर्णिमा भी मनाई जाती है। इस दिन विष्णु जी के वामन अवतार की भी पूजा की जाती है।
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|
पूर्णिमा |
दिन |
तिथि |
|---|---|---|
|
पौष पूर्णिमा |
03 जनवरी |
शनिवार |
|
माघ पूर्णिमा |
01 फरवरी |
रविवार |
|
फाल्गुन पूर्णिमा व्रत |
03 मार्च |
मंगलवार |
|
चैत्र पूर्णिमा |
02 अप्रैल |
गुरुवार |
|
वैशाख पूर्णिमा |
01 मई |
शुक्रवार |
|
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत (अधिक) |
31 मई |
रविवार |
|
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत |
29 जून |
सोमवार |
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आषाढ़ पूर्णिमा |
29 जुलाई |
बुधवार |
|
श्रावण पूर्णिमा |
28 अगस्त |
शुक्रवार |
|
भाद्रपद पूर्णिमा |
26 सितंबर |
शनिवार |
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अश्विन पूर्णिमा व्रत |
26 अक्टूबर |
सोमवार |
|
कार्तिक पूर्णिमा |
24 नवंबर |
मंगलवार |
|
मार्गशीर्ष पूर्णिमा |
23 दिसंबर |
बुधवार |
जैसा कि हमने पहले भी बताया कि पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है लेकिन इस दिन उपवास करने के कुछ नियम भी हैं। इस लेख में आगे बताया गया है कि 2026 पूर्णिमा पर व्रत रखने के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।
पूर्णिमा तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण कर लें। इससे तन और मन दोनों शुद्ध हो जाते हैं।
पूर्णिमा के व्रत में जल और फलाहार का सेवन कर सकते हैं लेकिन इस दिन भोजन में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है।उपवास के दौरान भगवान विष्णु और चंद्र देव की उपासना करनी चाहिए। स्नान के बाद अपने घर के पूजन स्थल को साफ करें और वहां पर एक दीपक जलाएं। अब भगवान की मूर्ति के सामने पुष्प, धूप, दीप, अक्षत और नैवेद्य रखें।
यदि आपने 2026 पूर्णिमा का व्रत रखा है, तो इस दिन व्रत कथा अवश्य सुनें। इससे व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
पूर्णिमा पर व्रत रखने के दौरान दिनभर सत्संग और पूजा-पाठ में लीन रहना चाहिए। इस दिन भजन-कीर्तन का आनंद लें। इससे मन को शांति मिलती है।
2026 पूर्णिमा पर दान करने का भी विशेष महत्व है। ब्राहृमणों और गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र एवं धन दान करें। इस दिन गाय को हरा चारा भी खिलाना चाहिए।
चूंकि, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के पूजन का अत्यधिक महत्व है इसलिए इस दिन रात्रि के समय चंद्रमा के निकलने पर उन्हें अर्घ्य जरूर दें। एक तांबे के लोटे में जल भलें और उसमें चावल, पुष्प और दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
व्रत रखने पर ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और किसी के बारे में भी अपशब्द नहीं बोलने चाहिए।
पूर्णिमा के अगले दिन प्रात: काल स्नान करने के पश्चात् विष्णु जी की उपासना करने के बाद ब्राह्मण या किसी गरीब व्यक्ति को भोजन करवाने के बाद व्रत का पारण करें।
इस पवित्र दिन पर क्रोध आदि जैसी नकारात्मक भावनाओं से बचना चाहिए।
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ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पूर्णिमा का व्रत चतुर्दशी के दिन सिर्फ तब रखा जाता है, जब पिछले दिन मध्याह्न के समय पूर्णिमा की शुरुआत हुई हो। यदि चतुर्दशी तिथि मध्याह्न के समय प्रबल रहती है, तो इससे पूर्णिमा तिथि अशुद्ध हो जाती है और ऐसे में चतुर्दशी तिथि का दिन उपवास रखने के लिए उपयुक्त नहीं रहता है। ऐसे में संपूर्ण सांय काल व्यापिनी पूर्णिमा के दिन का भी त्याग कर दिया जाता है।
उत्तर भारत में जब चांद अपने पूरे गोल आकार में निकलता है, उस दिन को पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। वहीं दक्षिणी भारत में इस दिन को पूर्णामी के नाम से मनाया जाता है। यहां पर पूर्णमासी के व्रत को पूर्णामी व्रतम कहा जाता है और इस दिन व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के निकलने तक किया जाता है।
आमतौर पर अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार साल में कुल 12 पूर्णमासी होती हैं लेकिन अगर ब्लू मून हो यानी कि महीने में दो पूर्णिमाएं हों, तो साल में 13 पूर्णमासी भी हो सकती हैं। पहले साल 2009, 2010, 2012, 2015, 2018 और 2020 में ब्लू मून देखा गया था।
जिन लोगों का जन्म पूर्णिमा के दिन होता है, वे धनी और संपन्न होते हैं।
ये बुद्धिमान और समझदार होते हैं। ये जो भी काम करते हैं, उसमें अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन देते हैं।
इन लोगों को खाने-पीने का बहुत शौक होता है।
ये कभी भी हार मानने वाले नहीं होते हैं और जब तक सफलता नहीं मिलती है, तब तक प्रयास करते रहते हैं।
इन लोगों का आत्मविश्वास बहुत मजबूत रहता है जो सफलता पाने में इनके लिए सहायक बनता है।
इन्हें उच्च स्तर का जीवन जीना पसंद होता है।
ये जातक कल्पनाशील होते हैं और अपनी उपलब्धियों का गुणगान करना पसंद करते हैं।
कभी-कभी ये लोग तर्कहीन हो सकते हैं और अपनी बात पर अडिग रहते हैं। इससे इनकी अपनी छवि के खराब होने का डर रहता है।
आगे बताया गया है कि 2026 में पूर्णिमा तिथि पर कौन-कौन से पर्व पड़ते हैं:
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र महीने में आने वाली पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती मनाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था।
वहीं वैशाख मास की पूर्णिमा पर बुद्ध जयंती पड़ती है। देशभर में इस पर्व को भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
जो पूर्णिमा ज्येष्ठ के महीने में आती है, उस पर वट सावित्री का व्रत किया जाता है।
आषाढ़ मास की 2026 पूर्णिमा पर गुरु पूर्णिमा पड़ती है। इस दिन गुरुओं का सम्मान एवं पूजन करने का विधान है। इसी दिन कबीर जयंती भी आती है।
श्रावण मास को आने वाली पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। देशभर में राखी के इस त्योहार का बहुत ज्यादा महत्व है।
भाद्रपद की पूर्णिमा पर उमा माहेश्वर व्रत किया जाता है।
जो 2026 पूर्णिमा तिथि अश्विन महीने में आती है, उसे शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
कार्तिक मास में पूर्णिमा के दिन पुष्कर मेला लगता है और गुरु नानक जयंती मनाई जाती है।
पूर्णिमा तिथि पर किए जाने वाले ज्योतिषीय उपाय निम्न प्रकार से हैं:
अगर किसी व्यक्ति की चंद्रमा की महादशा चल रही है या कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ है, तो उस जातक को नौ रत्ती का मोती रत्न अपने दाएं हाथ की कनिष्ठिका उंगली में धारण करना चाहिए।
यदि आप इस दिन व्रत रख सकते हैं, तो जरूर रखें। पूर्णिमा पर पवित्र नदी या तालाब में स्नान करने का भी बहुत महत्व है। इसके बाद देवी-देवताओं की पूजा करें और अपने पूर्वजों को स्मरण करें।
पूर्णमासी की रात्रि को मां लक्ष्मी की पूजा करें और श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर आपके घर में आर्थिक संपन्नता प्रदान करेंगी।
इस दिन मां लक्ष्मी को चावल से बनी खीर चढ़ाएं और फिर आप स्वयं एवं अपने परिवार के सदस्यों को खीर का प्रसाद खिलाएं। इस उपाय को करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है।
शादीशुदा जिंदगी में सुख-शांति बनाए रखने के लिए आप पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करने के बाद पीपल के वृक्ष पर जल चढ़एं। ऐसा करने से कभी भी घर में सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती है।
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हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा ये लेख जरूर पसंद आया होगा। ऐसे ही और भी लेख के लिए बने रहिए एस्ट्रोकैंप के साथ। धन्यवाद!
1. पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा का आकार क्या होता है?
इस दिन चंद्रमा पूरे गोल आकार में निकलता है।
2. एक वर्ष में कितनी पूर्णमासी आती हैं?
एक साल में कुल 12 पूर्णिमा तिथियां पड़ती हैं।
3. श्रावण पूर्णिमा पर कौन सा त्योहार पड़ता है?
इस दिन रक्षाबंधन मनाया जाता है।