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मुंडन मुहूर्त 2021 तिथि एवं समय | Mundan Muhurat 2021 Dates & Timings

Last Updated: 5/26/2020 10:22:24 AM

मुंडन मुहूर्त 2021 (Mundan Muhurat 2021) में आप जानेंगे कि आखिर कब करें वर्ष 2021 में अपने बच्चों का शुभ मुहूर्त अनुसार मुंडन संस्कार? हमारे इस लेख में आपको मुंडन संस्कार के लिए सभी शुभ मुहूर्त की जानकारी के साथ-साथ पढ़ने को मिलेगा, मुंडन संस्कार से होने वाले लाभ और इसका ज्योतिषी महत्व भी। लेकिन मुंडन मुहूर्त 2021 के बारे में जानने से पहले हमें यह अच्छी तरह से समझने की ज़रूरत होगी कि हमे मुंडन मुहूर्त की आवश्यकता क्यों होती हैं।

Mundan ceremony Dates 2021

 

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मुंडन मुहूर्त 2021

सनातन धर्म के अनुसार, मुंडन संस्कार एक प्रकार से हमारी परंपराओं का ही हिस्सा है, जो हमारे सभी 16 प्रमुख संस्कारों में से एक विशेष संस्कार है। इस संस्कार को चूड़ाकर्म, चौलकर्म, चौल मुंडन, आदि नामों से भी जाना जाता है, जिस दौरान बच्चों के जन्मकालीन यानी जन्म के दौरान के केश/बालों को काटकर उसका मुंडन किया जाता है। मुंडन संस्कार को लोग अपनी-अपनी कुल परंपरा के अनुसार करते हैं, इसलिए मान्यताओं अनुसार इसे एक विशेष मुहूर्त में ही किया जाना शुभ माना जाता है। इस शुभ समय को जिसमें मुंडन संस्कार संपन्न किया जाता है, उसे मुंडन मुहूर्त कहा जाता है।

ऐसे में आज हम अपने इस लेख में आपको वर्ष 2021 के सभी मुंडन संस्कार के शुभ मुहूर्त की सूची नीचे दे रहे हैं। जिसे आप अपनी सुविधा अनुसार इस्तेमाल कर, अपने बच्चों के लिए मुंडन मुहूर्त के शुभ मुहूर्त का चयन कर सकते हैं।

 

मुंडन मुहूर्त 2021 की सूची

फरवरी मुंडन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
22 फरवरी, 2021 सोमवार 06:53:53, बजे से 10:58:12, बजे तक
24 फरवरी, 2021 बुधवार 18:07:29, बजे से 30:51:57, बजे तक
25 फरवरी, 2021 गुरुवार 06:50:59, बजे से 13:17:57, बजे तक
 
मार्च मुंडन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
03 मार्च, 2021 बुधवार 06:44:52, बजे से 24:23:44, बजे तक
10 मार्च, 2021 बुधवार 14:42:01, बजे से 30:37:16, बजे तक
11 मार्च, 2021 गुरुवार 06:36:10, बजे से 14:41:39, बजे तक
24 मार्च, 2021 बुधवार 06:21:14, बजे से 23:13:07, बजे तक
29 मार्च, 2021 सोमवार 20:56:32, बजे से 30:15:24, बजे तक
 
अप्रैल मुंडन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
07 अप्रैल, 2021 बुधवार 06:05:05, बजे से 26:30:47, बजे तक
19 अप्रैल, 2021 सोमवार 05:52:10, बजे से 24:02:58, बजे तक
26 अप्रैल, 2021 सोमवार 12:46:12, बजे से 29:45:18, बजे तक
29 अप्रैल, 2021 गुरुवार 14:30:21, बजे से 22:12:09, बजे तक
 
मई मुंडन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
03 मई, 2021 सोमवार 08:22:41, बजे से 13:41:39, बजे तक
05 मई, 2021 बुधवार 13:24:03, बजे से 29:37:34, बजे तक
06 मई, 2021 गुरुवार 05:36:46, बजे से 10:32:38, बजे तक
14 मई, 2021 शुक्रवार 05:44:58, बजे से 29:31:13, बजे तक
17 मई, 2021 सोमवार 05:29:27, बजे से 11:36:14, बजे तक
24 मई, 2021 सोमवार 05:26:05, बजे से 24:13:15, बजे तक
27 मई, 2021 गुरुवार 13:04:36, बजे से 22:29:55, बजे तक
 
जून मुंडन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
21 जून, 2021 सोमवार 05:23:35, बजे से 13:33:42, बजे तक
28 जून, 2021 सोमवार 14:18:22, बजे से 29:25:26, बजे तक
 
जुलाई मुंडन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
07 जुलाई, 2021 बुधवार 18:19:30, बजे से 27:23:00, बजे तक
 

क्यों किया जाता है मुंडन संस्कार ?

हिंदू धर्म के सभी 16 संस्कारों में से, मुंडन संस्कार को बेहद महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। जिसे बाल्यावस्था में ही यानी जन्म से 5 वर्ष की उम्र के बीच संपन्न किये जाने का विधान है। मुंडन संस्कार के पीछे ज्योतिष एवं वैज्ञानिक तथ्य दोनों ही बेहद महत्व रखते हैं, और उसी के अनुसार माना जाता है कि बच्चे के जन्मकालीन बाल बेहद अशुद्ध होते हैं। ऐसे में उन्हें हटाना आवश्यक होता है।

ज्योतिष विज्ञान में माना जाता है कि करीब 84 योनियों को भोगने के बाद ही हर किसी को मानव जन्म मिल पाता है और अपने पूर्व जन्म के सभी पाप और अन्य बुरे कर्मों के लक्षण बच्चे के जन्म के बालों में समा जाते हैं, जिन्हे पूरे रीती-रिवाज अनुसार पहली बार कटाए जाने की प्रक्रिया को ही मुंडन कहते हैं। पहली बार किसी भी बच्चे का मुंडन एक विशेष समयावधि (मुहूर्त) अनुसार ही किया जाता है। इस संस्कार का महत्व केवल हिन्दू धर्म में ही नहीं बल्कि, मुस्लिम समुदाय में भी इस संस्कार को निभाया जाता है, जिसे अकीका के नाम से जाना जाता है।

 

मुंडन मुहूर्त 2021 का महत्व

ज्योतिष अनुसार मुंडन संस्कार संपन्न करने के लिए, उसका शुभ मुहूर्त निकलवाना बेहद ज़रूरी होता है। चूँकि ये संस्कार बच्चे के जीवन पर बहुत तरीकों से अपना प्रभाव छोड़ता है, इसलिए इसे सही मुहूर्त अनुसार कराना अनिवार्य हो जाता है। माना जाता है कि इस संस्कार से बच्चों के बल, बुद्धि और पराक्रम में वृद्धि होती है। जो बच्चे बचपन में चंचल प्रकृति के होते हैं, उनका यदि मुंडन सही मुहूर्त अनुसार किया जाए तो उनकी मानसिक चंचलता और अन्य प्रकार के सभी विकारों से बचाव हो सकता है। मुंडन के बाद बच्चों की बौद्धिक शक्ति का भी विकास होता है। ऐसे में लोग इस कर्मकांड को शुभ मुहूर्त अनुसार ही आरंभ करना उचित मानते हैं।

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क्यों किया जाता है मुंडन संस्कार

पौराणिक काल से ही मुंडन संस्कार का बहुत खास महत्व रहा है। माना जाता है कि मुंडन कराने के बाद बच्चों को प्रत्यक्ष रूप से कई विशेष लाभ प्राप्त होते हैं, जिससे बच्चे के शरीर की अनावश्यक गर्मी खत्म होती है। जन्म के समय देखा जाता है कि, बच्चों का सिर बहुत कमजोर और गर्म रहता है। ऐसे में मुंडन के बाद सिर को तो मजबूती मिलती ही है, साथ ही मस्तिष्क भी सामान्य से ठंडा हो जाता है। डॉक्टर भी मुंडन संस्कार को विशेष महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार बच्चों के जब दाँत निकलते हैं तो, उस समय उन्हें सिर दर्द होता है। ऐसे में मुंडन करने से उन्हें, दाँत निकलने के समय सिर के दर्द के साथ-साथ तालु के कांपने की समस्या से भी राहत मिलती है। जन्म के समय के बाल आमतौर पर बेहद हल्के और कमज़ोर होते है, लेकिन मुंडन के बाद बच्चों के केश काले और मजबूत निकलने लगते हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण संस्कार को और भी अधिक शुभ और लाभकारी बनाने के लिए, इसे शुभ मुहूर्त अनुसार किया जाना अनिवार्य हो जाता है।

 

मुंडन मुहूर्त की गणना और संपन्न करने का समय?

मुंडन संस्कार के लिए उचित शुभ मुहूर्त निकालना बेहद सरल है। इसे हम किसी ज्योतिषी विशेषज्ञ या किसी विद्वान पुरोहित की मदद से भी निकलवा सकते हैं। हिन्दू पंचांग अनुसार, मुंडन करने के लिए शुभ नक्षत्र, शुभ तिथि, शुभ वार और शुभ लग्न का होना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में पुरोहित इन्ही का सही आकलन कर मुहूर्त की गणना करते हैं। इस दौरान हमे भी कुछ ख़ास बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • माना जाता है कि जिन बच्चों का जन्म चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ में हुआ हो उनका इस माह में मुंडन संस्कार नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही घर के बड़े बच्चे का भी मुंडन इस माह के दौरान करना अशुभ माना गया है।
  • जबकि आषाढ़ में मुंडन संस्कार आषाढ़ी एकादशी से पहले और माघ और फाल्गुन मास में कराना शुभ माना गया है।
  • तिथियों में द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथि मुंडन संस्कार के लिए उचित मानी गई हैं।
  • सप्ताह के दिनों में से सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार मुंडन संस्कार के लिए शुभ माने गए हैं। लेकिन इस दौरान एक बात का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है कि यदि किसी बालिका का मुंडन करना चाह रहे हैं तो, उसके लिए शुक्रवार का दिन वर्जित माना गया है।
  • अश्विनी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, पुनर्वसु, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठ, श्रवण, धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र मुंडन संस्कार के लिए उत्तम बताए गए हैं।
  • ज्योतिषी विशेषज्ञ बच्चे के जन्म मास व जन्म नक्षत्र और चंद्रमा के चतुर्थ, अष्टम, द्वादश और शत्रु भाव में स्थित होने पर मुंडन संस्कार इस स्थिति में आरंभ किये जाना निषेध मानते हैं। वहीं कई लोग जन्म नक्षत्र या जन्म राशि को बच्चे के मुंडन के लिए शुभ समय मानते हैं।
  • इसके साथ ही द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, षष्टम, सप्तम, नवम या द्वादश राशियों के लग्न या इनके नवांश में मुंडन प्रक्रिया आरंभ होना बेहद शुभ रहता है।
  • मान्यता अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद से ही 3, 5 और 7वें वर्ष में मुंडन संस्कार करना चाहिए। हालांकि कई लोग इसे अपनी कुल परंपरा अनुसार, जन्म के प्रथम वर्ष में भी इसे संपन्न कर सकते हैं।
  • मुंडन संस्कार के दिन घर में किसी पंडित की मदद से यज्ञ या हवन होना अनिवार्य होता है।
  • ज्योतिष शास्त्र अनुसार, बालकों का मुंडन विषम वर्ष यानि 3, 5 और 7 में होना उचित रहता है, जबकि बालिकाओं का मुंडन सम वर्षों यानि जन्म से 2, 4, 6, 8 वर्ष में कराना अच्छा माना गया है।

मुंडन संस्कार के समय ज़रूर बरतें ये सावधानियाँ

  • बच्चे का मुंडन कराने से पहले विधि-विधान अनुसार उस्तरे या कैंची का पूजन आवश्यक करें। ऐसा न करना अशुभ माना जाता है।
  • अपने बच्चे के मुंडन के लिए शुभ मुहूर्त किसी योग्य और अनुभवी ज्योतिषी की मदद से ही निकलवाए, क्योंकि इस संस्कार को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में इसके प्रति छोटी भी लापरवाही भी आपके बच्चे को जीवन भर परेशानी दे सकती है।
  • मुंडन संस्कार किसी धार्मिक स्थान पर करना उचित रहता है।
  • बच्चे का मुंडन होने के कुछ दिनों बाद तक, बच्चे को घर में ही रखें। अन्यथा बाहर जाने पर बच्चे को नकारात्मक शक्तियों द्वारा प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
  • मुंडन संस्कार होने के बाद बच्चे के हाथों से दान-पुण्य करना लाभकारी सिद्ध होता है।
  • मुंडन संस्कार के दौरान बच्चे के परिवार के सभी सदस्यों का होना, अनिवार्य होता है।

हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा लिखा गया ये “मुंडन मुहूर्त 2021”, आपके लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा। हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।

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