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जनेऊ मुहूर्त 2021 - उपनयन मुहूर्त 2021 | यज्ञोपवीत मुहूर्त 2021 तिथि एवं शुभ समय

Last Updated: 7/27/2020 2:41:12 PM

उपनयन मुहूर्त 2021 (Upanayana Muhurat 2021) में आप जानेंगे कि आखिर शुभ मुहूर्त अनुसार वर्ष 2021 में कब करें अपने बच्चों का उपनयन संस्कार? हमारे इस लेख के द्वारा आपको उपनयन संस्कार के लिए सभी शुभ मुहूर्त की जानकारी के साथ-साथ, उपनयन संस्कार से होने वाले लाभ और इसका ज्योतिषीय महत्व भी जानने को मिलेगा। लेकिन उपनयन मुहूर्त 2021 के बारे में जानने से पहले हमें यह अच्छी तरह से समझना होगा कि आख़िर हमें उपनयन मुहूर्त की आवश्यकता क्यों होती हैं।

Annprashan Muhurat 2020

उपनयन मुहूर्त 2021

हिंदू धर्म के सभी 16 संस्कारों में उपनयन संस्कार को दसवाँ स्थान प्राप्त है। उपनयन संस्कार को संस्कृत में यज्ञोपवीत संस्कार या फिर इसे जनेऊ संस्कार भी कहा जाता है। एक पुरुष के जीवन में इस संस्कार का बहुत महत्व होता है, जो कि कर्णभेद संस्कार के बाद किया जाता है। उपनयन संस्कार बालक के किशोरावस्था से युवा अवस्था में प्रवेश करने के बाद करते हैं। इस संस्कार को पूरे रीति-रिवाज़ों के साथ निभाया जाता है और बालक को जनेऊ पहनाया जाता है। जनेऊ संस्कार का अर्थ होता है कि बच्चा अब विद्या ग्रहण करने योग्य हो गया है और इसी दिन से उसका विद्यारंभ होता है।

वहीँ अगर ‘यज्ञोपवीत’ शब्द को देखें तो यह “यज्ञ” और “उपवीत” शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है यज्ञ-हवन आदि करने का अधिकार प्राप्त होना। ऐसी मान्यता है कि बिना जनेऊ संस्कार के पूजा पाठ करना, विद्या प्राप्त करना और व्यापार आदि करना सब कुछ निरर्थक होता है। यह संस्कार ब्राह्मण बालक का आठ साल की उम्र में, क्षत्रिय बालक का ग्यारह साल की उम्र में और वैश्य बालक का बारह साल की उम्र में होता है।

शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि जनेऊ संस्कार की विधि से बालक के पिछले जन्मों में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए यह बालक का दूसरा जन्म भी माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार जनेऊ संस्कार होने के बाद ही बच्चे का धर्म में प्रवेश माना जाता है। पुराने समय में इस संस्कार के बाद ही बालक को शिक्षा दी जाती थी। किसी भी बालक की आयु और बुद्धि बढ़ाने के लिए जनेऊ संस्कार बेहद ज़रूरी होता है।

अपने इस लेख के जरिये हम आपको साल 2021 में पड़ने वाले सभी उपनयन मुहूर्तों के बारे में जानकारी देंगे। नीचे दी गई तालिका को देखकर आप अपनी सुविधानुसार उपनयन संस्कार के लिए सही मुहूर्त का चयन कर सकते हैं।

उपनयन मुहूर्त 2021 की सूची

अप्रैल उपनयन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
22 अप्रैल गुरुवार 05:49 06:55
29 अप्रैल गुरुवार 05:42 11:48
अप्रैल उपनयन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
13 मई गुरुवार 05:32 14:29
16 मई रविवार 10:01 14:17
17 मई सोमवार 05:29 11:35
21 मई शुक्रवार 11:11 15:22
23 मई रविवार 06:43 06:48
30 मई रविवार 05:24 15:03
अप्रैल उपनयन मुहूर्त 2021
दिनांक वार मुहूर्त की समयावधि
13 जून रविवार 05:23 14:44
20 जून रविवार 10:31 16:22

उपनयन मुहूर्त 2021 का महत्व

हिन्दू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ आदि को करने के पीछे एक कारण छिपा होता है। अब वह कारण चाहें धार्मिक हो, वैज्ञानिक हो या फिर ज्योतिषीय हो। ठीक इसी प्रकार जनेऊ संस्कार यानि उपनयन संस्कार को संपन्न करने के पीछे भी कुछ विशेष कारण छिपे हैं। चलिए जानते हैं कि वो कौन से खास कारण हैं, जिनकी वजह से उपनयन संस्कार को आज के समय में भी खास महत्व दिया जाता है।

  • धार्मिक महत्व

जनेऊ संस्कार को करने के पीछे के धार्मिक कारण को देखें तो इस संस्कार का सीधा संबंध ब्रहमा, विष्णु और महेश से है। इसके तीन सूत्र त्रिदेव(ब्रह्मा, विष्णु, महेश ) का प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए जनेऊ एक पवित्र धागा होता है। किसी भी जनेऊ में पाँच गाँठ लगाई जाती हैं, जो कि ब्रह्म, धर्म, अर्ध, काम और मोक्ष का प्रतीक होते हैं।

  • वैज्ञानिक महत्व

उपनयन संस्कार का वैज्ञानिक रूप से भी विशेष महत्व बताया गया है। चिकित्सीय विज्ञान के अनुसार, व्यक्ति के पीठ पर एक नस होती है, जो कि दाएँ कंधे से लेकर कमर तक जाती है। यह बेहद सूक्ष्म नस होती है, जो विद्युत के प्रवाह की तरह कार्य करती है। अगर व्यक्ति की यह नस संकूचित अवस्था में रहे, तो काम-क्रोध आदि जैसे विकार पर वह नियंत्रण पा लेता है। दाएँ कंधे से लेकर कमर तक जाने वाली जनेऊ इस नस को इसी अवस्था में रखता है। इसलिए जनेऊ पहनने वाले इंसान के अंदर मानवीय गुणों का विकास होता है और बुरे विचार उसे परेशान नहीं करते। साथ ही यह व्यक्ति की आयु, बल और बुद्धि में भी वृद्धि करने में मददगार होता है।

  • ज्योतिषीय महत्व

वैदिक ज्योतिष में कुल नौ ग्रह होते हैं- मंगल, बुध, सूर्य, चंद्र, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। ज्योतिष के अनुसार इन्हीं ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। जनेऊ के तीन धागों में कुल नौ लड़ियाँ होती हैं, जिन्हें नवग्रह का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए शास्त्रों के अनुसार जनेऊ धारण करने वाले व्यक्ति को नवग्रहों का आशीर्वाद मिलता है।

इसके अलावा जनेऊ के रंग का भी संबंध ज्योतिष से होता है। यह एक सफ़ेद रंग का धाग होता है, जिसे बालक को पहनाते समय पीले रंग से रंगा जाता है। सफ़ेद रंग का संबंध सौन्दर्य, काम, सुख और कला आदि का कारक माने जाने वाले शुक्र ग्रह से होता है, तो वहीँ जनेऊ के पीले रंग का संबंध ज्ञान, गुरु, अच्छे कर्मों आदि के कारक कहे जाने वाले बृहस्पति ग्रह से है।

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उपनयन मुहूर्त 2021 की गणना और संपन्न करने का समय

जैसा कि हमने आपको उपर लेख में बताया कि उपनयन संस्कार किसी भी बालक के किशोरावस्था से युवाअवस्था में प्रवेश करने पर संपन्न करते हैं। सनातन परंपरा के अनुसार हर शुभ कार्य की तरह ही इसे भी एक निर्धारित शुभ समय में करना अनिवार्य होता है क्योंकि माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किया गया हर काम न केवल सफल होता है, बल्कि जिस उद्देश्य के साथ उस कार्य को किया जा रहा हो, वह उद्देश्य भी पूर्ण होता है। दुसरे 16 संस्कारों की तरह ही उपनयन संस्कार भी एक शुभ कार्य है, इसलिए जनेऊ पहनाने का काम भी शुभ मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए। तो चलिए जानते हैं की जनेऊ मुहूर्त 2021 के शुभ मुहूर्त के चयन के दौरान हमे किस बात का मुख्यतौर पर ध्यान रखना चाहिए:-

  • हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ महीने से लेकर आने वाले 6 महीने तक का समय उपनयन संस्कार के लिए शुभ माना गया है। चैत्र के महीने में केवल ब्राहा्ण बटुकों का उपनयन किया जाता है।
  • इस संस्‍कार को शुक्‍लपक्ष में 2, 3, 5, 10, 11, 12 तिथि में तथा कृष्‍णपक्ष में मात्र 2, 3, 5, तिथि में किया जाता है। उपनयन कर्म पूर्वाह्र एवं मध्‍याह्र में किया जाता है। रोगबाण होने पर यज्ञोपवीत नहीं करना चाहिए।
  • वार यानि दिन की बात करें तो पूरे 7 दिनों के सप्ताह में उपनयन संस्कार को करने के लिए बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार का दिन शुभ माना गया है। इन तीन दिनों के अलावा रविवार का दिन मध्यम, तो वहीं सोमवार का दिन बहुत ही कम शुभ होता है। जनेऊ संस्कार को करने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन अशुभ माना गया है। इसीलिए इस संस्कार को संपन्न करते समय दिन का ध्यान विशेषतौर पर रखा जाता है।
  • नक्षत्रों की बात करें तो सबसे शुभ नक्षत्र हस्त, चित्रा, स्वाति, पुष्य, घनिष्ठा, अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, श्रवण एवं रेवती हैं। इसके अलावा यदि किसी कारणवश आप इन नक्षत्रों में जनेऊ संस्कार नहीं कर पाएं तो भरणी, कृत्तिका, मघा, विशाखा, ज्येष्ठा, शतभिषा नक्षत्र जिस में उपनयन संस्‍कार वर्जित है को छोड़कर अन्य किसी भी नक्षत्रों में जनेऊ संस्कार की विधि संपन्न कर सकते हैं। पुनर्वसु नक्षत्र में विप्र बटुकों का उपनयन संस्कार करना वर्जित होता है।

कैसे करें उपनयन संस्कार 2021?

  • जनेऊ संस्कार को संपन्न करने के लिए एक यज्ञ का आयोजन होता है।
  • इस यज्ञ में जिस भी बालक का संस्कार हो रहा होता है, उसका पूरा परिवार हिस्सा लेता है।
  • जनेऊ संस्कार के दिन सबसे पहले बच्चे का मुंडन होता है, जिसमें सारे बालों को निकालने के बाद पीछे की तरफ एक चोटी छोड़ दी जाती है।
  • मुंडन हो जाने के बाद बच्चे को नहलाकर उसके सिर पर यानि जिस हिस्से से बाल निकाला गया होता है, वहां पर चन्दन और केसर का लेप लगाया जाता है।
  • जनेऊ को बच्चे के बाएँ कंधे से दाहिने बाजू की तरफ पहनाया जाता है।
  • जो धागा बच्चे को पहनाया जाता है, उसे विधिपूर्वक तैयार करते हैं। जनेऊ का वास्तविक रंग सफ़ेद होता है, जिसे बालक को पहनाने से पीले रंग से रंग दिया जाता है।
  • एक बार गुरु दक्षिणा ले लेने के बाद जनेऊ को शरीर से नहीं उतारना चाहिए।
  • उपनयन संस्कार के दौरान हवन का आयोजन किया जाता है। इस हवन प्रक्रिया में विधिविधान से देवताओं की पूजा की जाती है। बालक को अधोवस्त्र के साथ माला पहनाकर यज्ञवेदी के सामने बैठाया जाता है। इस बात का ध्यान रखें कि बालक को आप बिना सिले हुए वस्त्र ही धारण कराएं।
  • जिस बच्चे का जनेऊ संस्कार होना हो रहा होता है, उसके गले में पीले रंग का एक वस्त्र डाला जाता है और साथ ही पैरों में खड़ाऊ पहनना होता है।
  • अब दस बार गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित करके देवताओं का आह्वान करें और बालक को शास्त्र शिक्षा और व्रतों के पालन का वचन दें।
  • फिर जिस बालक का संस्कार किया जा रहा हो, उसकी उम्र के बच्चों के साथ उसे बिठाकर चूरमा खिलाते हैं।
  • इसके बाद स्नान कराकर उस वक्त वहां मौजूद गुरु, पिता या बड़ा भाई गायत्री मंत्र सुनाते हुए उस बालक से कहता है कि “आज से तू अब ब्राह्मण हो गया ”।
  • इसके बाद वर्णानुसार जातकों को मेखला धारण करवाई जाती है, जिसमें ब्राह्मण बालक को मुंज और क्षत्रिय बालक होने पर धनुष की डोर और वैश्य बालक को ऊन के धागे की कोंधनी धारण कराते हैं।
  • मेखला के साथ एक दंड(डंडा) हाथ में देकर उस बालक को वहां उपस्थित लोगों से भीक्षा मांगने को कहा जाता है।
  • बालक डंडे को कंधे पर रखकर घर से भागता है और यह कहता है कि “मैं पढ़ने के लिए काशी जा रहा हूँ”।
  • बाद में कुछ लोग बालक को शादी का लालच देकर पकड़कर वापस ले आते हैं। इसके बाद ही बालक ब्राह्मण मान लिया जाता है और इस तरह से यह संस्कार संपन्न हो जाता है।

उपनयन संस्कार 2021 के लिए विशेष मंत्र

यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्रं प्रतिमुंच शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।

उपनयन संस्कार 2021 से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

निम्नलिखित नियमों का पालन करने योग्य आयु हो जाने पर ही एक बच्चे का उपनयन संस्कार कराएं-

  • जिन जातकों का उपनयन संस्कार हो गया होता है, उन्हें कोई भी मांगलिक कार्य करने से पहले अपने जनेऊ को धारण करना आवश्यक होता है।
  • जन्म-मरण के सूतक के बाद हमेशा जनेऊ को बदल देना चाहिए।
  • जब भी जनेऊ धारण करने वाला व्यक्ति सौच के लिए जाता है, तो उसे जनेऊ को अपने दाहिने कान पर लपेट लेना चाहिए।
  • यदि जनेऊ का कोई धागा टूट जाए या एक ही जनेऊ को पिछले 6 महीने से पहन रहे हैं तो उसे समय रहते बदल लेना सही होता है।
  • किसी भी जातक का विवाह कराने से पहले, उपनयन संस्कार कराना अनिवार्य होता है।
  • जनेऊ में चाबी का गुच्छा या कोई धातु बांधना वर्जित होता है।

उपनयन संस्कार 2021 से होने वाले लाभ

एक रिसर्च के अनुसार जो भी व्यक्ति जनेऊ धारण करता है, उसे ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी समस्या नहीं होती है। चिकित्सकों का ऐसा मानना है कि जनेऊ हृदय के पास से गुजरता है जिसकी वजह से हृदय रोग की संभावना कम हो जाती है। साथ ही हमारे शरीर में दायें कान के पास से ऐसी नसें गुजरती हैं जिनका सीधा संबंध हमारी आंतों से होता है। और जब मल-मूत्र विसर्जन के समय कान में जनेऊ लपेटा जाता है तो इस से इन नसों में दबाव पड़ता है और व्यक्ति का पेट अच्छी तरह से साफ़ हो जाता है।

उपनयन संस्कार एक बालक की शिक्षा-दीक्षा आरंभ कराने के उद्देश्य से किया जाता है। शिक्षा से ही एक मनुष्य का सर्वांगीण विकास संभव है। इसलिए उपनयन संस्कार एक बालक के विकास के लिए बहुत आवश्यक होता है। उपनयन संस्कार के द्वारा बालक को यह भी संदेश दिया जाता है कि उसके ऊपर समाज को बेहतर बनाने और समाज के हित में कार्य करने का दायित्व है। जनेऊ धारण करने के बाद बालक अपने धर्म को समझता है और उसी के अनुरुप व्यवहार करने की शपथ लेता है।

आशा हैं कि “उपनयन मुहूर्त 2021”, का यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।

हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।

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